मोहब्बत का इशारा याद रहता है;
हर प्यार को अपना प्यार याद रहता है;
दो पल जो प्यार की बाहों में गुज़रे हों;
मौत तक वो नज़ारा याद रहता है।
हर प्यार को अपना प्यार याद रहता है;
दो पल जो प्यार की बाहों में गुज़रे हों;
मौत तक वो नज़ारा याद रहता है।
कदर करनी है,
तो जीतेजी करो,
अरथी उठाते वक़्त तो
नफरत करने वाले भी रो पड़ते है.
कभी किसी से प्यार मत करना!
हो जाये तो इंकार मत करना!
चल सको तो चलना उस राह पर!
वरना किसी की ज़िन्दगी ख़राब मत करना!
कोई कहता है प्यार नशा बन जाता है!
कोई कहता है प्यार सज़ा बन जाता है!
पर प्यार करो अगर सच्चे दिल से, तो वो प्यार ही जीने की वजह बन जाता है
मुहब्बत का इम्तिहान आसान नहीं!
प्यार सिर्फ पाने का नाम नहीं!
मुद्दतें बीत जाती हैं किसी के इंतज़ार में!
ये सिर्फ पल-दो-पल का काम नहीं!
इश्क मुहब्बत तो सब करते हैं!
गम - ऐ - जुदाई से सब डरते हैं
हम तो न इश्क करते हैं न मुहब्बत!
हम तो बस आपकी एक मुस्कुराहट पाने के लिए तरसते हैं!
इश्क के रिश्ते कितने अजीब होते है?
दूर रहकर भी कितने करीब होते है;
मेरी बर्बादी का गम न करो;
ये तो अपने अपने नसीब होते हैं!
रात सुबह का इंतज़ार नहीं करती;
खुशबु मौसम का इंतज़ार नहीं करती;
जो भी ख़ुशी मिले उसका आनंद लिया करो;
क्योंकि जिंदगी वक़्त का इंतज़ार नहीं करती।
रिश्ते चाहे जितने भी बुरे हों लेकिन कभी भी उन्हें मत तोड़ना;
क्योंकि
पानी चाहे कितना भी गन्दा हो प्यास नहीं तो आग तो बुझाता ही है।
जब किसी महापुरुष से पूछा गया कि गुस्सा क्या चीज़ है?
तो महापुरुष ने बहुत खूबसूरत जवाब दिया, "किसी की गलती की सज़ा खुद को देना।"
हमेशा अपनी छोटी-छोटी गलतियों से बचने की कोशिश करो;
क्योंकि;
इंसान पहाड़ों से नहीं छोटे पत्थरों से ठोकर खाता है।
बुढ़ापा बाकि सभी चीजों की तरह ही है;
इसे सफल बनाने के लिए जवानी में ही शुरुआत करनी पड़ती है।
बहुत कुछ सिखा जाती है जिंदगी;
हंसा के रुला जाती है जिंदगी;
जी सको जितना उतना जी लो दोस्तों;
क्योंकि बहुर कुछ बाकी रहता है, और ख़त्म हो जाती है जिंदगी।
हंसा के रुला जाती है जिंदगी;
जी सको जितना उतना जी लो दोस्तों;
क्योंकि बहुर कुछ बाकी रहता है, और ख़त्म हो जाती है जिंदगी।
गर्दिशो में तक़दीर के सितारे भी सोये थे ,
वो तो फिर भी अपनी धुन में खोये थे ,
अरे जिसने करीब आकर हल तक न पूछा ,
हम ये कैसे मन ले की वो दूर जाकर रोये थे
'सब्र' एक ऐसी 'सवारी' है जो अपने 'सवार' को कभी गिरने नहीं देती;
ना किसी के 'क़दमों' में और ना किसी के नज़रों 'में'।
[10/12 8:53 PM] +91 97296 05742: जब भी उसकी याद आती है तो सिगरेट जला लेता हूँ...
साहेबान.......
वो वक्त और था जब रो दिया करता था..........
पागल............ .....
[10/12 8:53 PM] +91 97296 05742: टेढ़े के साथ टेढ़ा हो जाना तो जगत में सभी को आता है और यह स्वाभाविक ही है;
लेकिन टेढ़े के साथ सीधा रहने का चमत्कार केवल ज्ञानी व्यक्ति ही कर पाते हैं।
भूख रिश्तों को भी लगती है;
प्यार कभी परोस कर तो देखिए।
अपनी ज़ुबान से इतने मीठे शब्द बोलो कि अगर कभी वापिस लेने पड़े तो खुद को कड़वे ना लगें।
फूल बनकर मुस्कुराना ज़िंदगी है;
मुस्कुरा के ग़म भुलाना ज़िंदगी है;
मिल कर खुश हुए तो क्या हुआ;
बिना मिले रिश्ते निभाना ज़िंदगी है।
रंग फिर उसने कोई, मेरी पसंद का चुना होगा
इस बार भी माँ ने, जब स्वेटर मेरा बुना होगा...
वो पूछता हैं की ख्वाबो में किसे देखते हो?
और हम हैं की उनकी यादो में सोए ही नहीं.
किसी ने कहा था महोब्बत फूल जैसी है!!कदम रुक गये आज जब फूलों को बाजार में बिकते देखा!
गर तेरी नज़र क़त्ल करने मे माहिर है तो सुन. .
हम भी मर मर के जीने मे उस्ताद हो गए
है |
है |
साथ थे तो एक लफ्ज ना निकला लबों से मेरे..
जरा दूर क्या हुये तो कलम ने कहर मचा दिया..
चढ गये जो हंसकर सूली, खाई जिन्होने सीने पर गोली, हम उनको प्रणाम करते हैं. जो मिट गये देश पर, हम उनको सलाम करते हैं..
क्यों मनाऊं उसको, जो मुझसे ख़फ़ा है।
वो उसकी अदा है, ये मेरी अदा है।।
एक सफ़र हमने ज़िंदगी का ऐसा भी किया
पांव की जगह दिल को ही दुखा दिया....
दिल मजबूर कर रहा है, उनसे बात करने को, और कम्बखत ज़िद करता है की शुरुआत वो करे..!
पानी की बूँदें फूलों को भीगा रही है , ठंडी लहरे एक ताजगी जगा रही है . हो जाओ आप भी इसमे शामिल, एक प्यारी सी सुबह आप को जगा रही है . गुड़ मॉर्निंग...
याद ना आने की कसम ताे लेली,
याद ना आने का वादा भी कर देते..
किसकी तलवार पर सर रखूँ बता दो मुझे ।
इश्क करना खता है तो सजा दो मुझे
नजर अंदाज करने कि
कुछ तो बजह बताई होती,
अब में कहाँ कहाँ खुद में बुराई ढूँढू ...!!
तुम्हें नहीं पता तुम मेरे लिये क्या हो? क्योंकि ..
तितली को कहाँ पता होता है कि उसके पंख कितने खुबसुरत हैं।
तू बहते पानी सा है, हर शक्ल में ढल जाता है, मैं रेत सा हूँ, मुझसे कच्चे घर भी नहीं बनते..
बुजदिल हें वो लोग जो #मोहब्बत नहीं करते, बहुत हौसला चाहिए #बर्बाद होने के लिए ।
आये तो यूँ कि जैसे हमेशा थे मेहरबाँ,
भूले तो यूँ कि जैसे कभी वाकिफ न थे।
गम को भुलाने का कोई जरिया होना चाहिए , जो समझे जज्बात वैसा दोस्त होना चाहिए !
ऐ इश्क तुने मेरे चेहरे को उदास किया है.....
अगर तू इंसान होता तो तेरा कत्ल मेरे हाथ होता.......।।
नींद तो अब भी बहुत आती है मगर...
समझा-बुझा के मुझे उठा देती हैं जिम्मेदारियां ....
ज़िन्दगी के हाथ नहीं होते..
लेकिन कभी कभी वो ऐसा थप्पड़ मारती हैं जो पूरी उम्र याद रहता हैं....
"उसे जाने कि जल्दी थी तो मैं आँखों ही आँखों में..
जहाँ तक छोड़ सकता था वहा तक छोड़ आया हूँ !!
हिलते लबो को तो दुनिया जान लेती हैं,
मुझे उसकी तलाश है जो ख़ामोशी पढ़ ले..
“तुझसे बिछड के फर्क बस इतना हुआ...,
तेरा गया कुछ नहीँ...और मेरा कुछ रहा नहीँ...।”
तुम्हें हाथो से नही दिल से छूना चाहती हूं..
ताकि तुम ख्वाबो में नही मेरी रूह में आ सको...!!!!
उसकी धाक सैकड़ों पे थी......गिनती भी उसकी शहर के बड़े-बड़ों में थी..
दफन वो केवल छ: फिट के गड्ढे में हुआ........जबकि जमीन उसके नाम तो कई एकड़ों में थी.
बस तुम्हेँ पाने की तमन्ना नहीँ रही..
मोहब्बत तो आज भी तुमसे बेशुमार करतेँ हैँ.!!
कोई बतायेगा...
कैसे दफ़नाते है उन ख्वाबो को ?
जो दिल में ही मर जाते है
शायरी तो मैँ अपने शौक के
लिए करता हूँ....
वरना ...
किसी के 'बाप_की_बेटी' में इतना दम नहीँ ,
जो इस सिरफिरे का दिल तोड सके...।।
उसकी याद करता हुं तो शराब भि साथ छोड देती है .....हंस के केहती है.. बस कर अब पगले ये गम मिटाना मेरे बस की बात नहीं ...
मैंने कब कहा कीमत समझो तुम मेरी,
हमें बिकना ही होता तो यूँ तन्हा ना होते....
तमन्ना तेरे जिस्म की होती तो छीन लेते दुनिया से
इश्क तेरी रूह से है इसलिए खुदा से मांगते हैं तुझे।
वो काम भला क्या काम हुआ जिसमे
साला दिल रो जाये
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ जो
आसानी से हो जाये
आसानी से हो जाये
एक अजनबी से मुझे इतना प्यार क्यों है; इंकार करने पर चाहत का इकरार क्यों है; उसे पाना नहीं मेरी तकदीर में शायद; फिर हर मोड़ पे उसी का इंतज़ार क्यों है!
होंठ कह नहीं सकते जो फ़साना दिल का; शायद नज़रों से वो बात हो जाए; इस उम्मीद से करते हैं इंतज़ार रात का; कि शायद सपनों में ही मुलाक़ात हो जाए!
मजा तो हमने इंतजार में देखा है, चाहत का असर प्यार में देखा है, लोग ढूंढ़ते हैं जिसे मंदिर मस्जिद में, उस खुदा को मैने आपमें देखा है
नज़र चाहती है दीदार करना; दिल चाहता है प्यार करना; क्या बतायें इस दिल का आलम; नसीब में लिखा है इंतजार करना।
कब उनकी पलकों से इज़हार होगा; दिल के किसी कोने में हमारे लिए प्यार होगा; गुज़र रही है रात उनकी याद में; कभी तो उनको भी हमारा इंतज़ार होगा!
आँखों में बसी है प्यारी सूरत तेरी; और दिल में बसा है तेरा प्यार; चाहे तू कबूल करे या ना करे; हमें रहेगा तेरा इंतज़ार!
इंतज़ार रहता है हर शाम तेरा; यादें काटती हैं ले-ले के नाम तेरा; मुद्दत से बैठे हैं तेरे इंतज़ार में; कि आज आयेगा कोई पैगाम तेरा!
हमने ये शाम चराग़ों से सजा रक्खी है; आपके इंतजार में पलके बिछा रखी हैं; हवा टकरा रही है शमा से बार-बार; और हमने शर्त इन हवाओं से लगा रक्खी है।
ज़ख्म इतने गहरे हैं इज़हार क्या करें; हम खुद निशान बन गए वार क्या करें; मर गए हम मगर खुलो रही आँखें; अब इससे ज्यादा इंतज़ार क्या करें!
आज उसने एक बात कह के
मुझे रुला दिया....
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जब दर्द बर्दाश्त नही होता
तो मोहब्बत क्यों की....©
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