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होंठों पे उल्फत के फ़साने नहीं आते; जो बीत गए फिर वो ज़माने नहीं आते; दोस्त ही होते हैं दोस्तों के हमदर्द; कोई फ़रिश्ते यहाँ साथ निभाने नहीं आते।
ुज़र चली है दबे पावं दिवाली की छुट्टियाँ,खयाल-ए-नौकरी आया तो आंखें भर आई..
'' जब इत्मीनान से, खंगाला खुद को,
थोड़ा मै मिला, और बहुत सारे तुम.!!
वक़्त की कीमतकोई उसअख़बार से पूछे . . .दिनबीत जाने के बादजिसकी कोई कीमतनहीं होती...
एक आदमी अपनी बीवी को दफना के घर जा रहा था कि अचानक बिजली चमकी, बादल गरजे और जोर की बारिश शुरू हुई। दुखी आदमी बोला: लगता है पंहुच गयी।
चुपके से आकर इस दिल में उतर जाते हो
सांसों में मेरी खुशबु बन के बिखर जाते हो
कुछ यूँ चला है तेरे इश्क का जादू
सोते जागते तुम ही तुम नज़र आते हो
कुछ रिश्ते अनजाने में बन जाते हैं; पहले दिल से फिर ज़िन्दगी से जुड़ जाते हैं; कहते हैं उस दौर को दोस्ती; जिसमे अनजाने ना जाने कब अपने बन जाते हैं।
दर्द जब आंसुओं में ढल जाए
मेरी आँखों में आके बह जाना
भूल कर काश –म –कश ज़माने की
मेरी बाहों में आके रह जाना..
दोस्ती कोई खोज नहीं होती; दोस्ती हर किसी से हर रोज़ नहीं होती; अपनी जिंदगी में हमारी मौजूदगी को बेवजह मत समझना; क्योंकि पलकें आँखों पर कभी बोझ नहीं होती।
गम ने हसने न दिया, ज़माने ने रोने न दिया!
इस उलझन ने चैन से जीने न दिया!
थक के जब सितारों से पनाह ली!
नींद आई तो तेरी याद ने सोने न दिया!
जब गब्बर पैदा हुआ तो उसकी मम्मा ने उसे 3 थप्पड़ लगाए.
गब्बर के पिता: क्या बात हो गई?
गब्बर की मां: कमबख्त पैदा होते ही पूछ रहा था कि कितने आदमी थे…
अजीब तरह के लोग हैं,इस दुनिया मे,अगरबती भगवान के लिए खरीदते हैं।और खुशबू खुद की पसंद की तय करते हे.?
कभी रो के मुस्कुराए , कभी मुस्कुरा के रोए, जब भी तेरी याद आई तुझे भुला के रोए, एक तेरा ही तो नाम था जिसे हज़ार बार लिखा, जितना लिख के खुश हुए उस से ज्यादा मिटा के रोए.
देखा करो कभी अपनी माँ की आँखों में,
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ये वो आईना है जिसमें बच्चे कभी बूढ़े नहीं होते...!
तुम्हारी एक चीज़ सब को बहुत पसंद है कि तुम हर काम दिल लगा कर करते हो, क्योंकि.... . . . . . . . दिमाग तो तुम्हारे पास है ही नहीं।
एक मैं था जो लफ्ज़ ढूंढ ढूंढ कर थक गया...!!!
वो ख़रीदे हुए फूल दे कर इज़हार कर गये...!!!
💔 heart...!!!
हमारे चले जाने के बाद,ये समुंदर भी पूछेगा तुमसे,कहा चला गया वो शख्सजो तन्हाई मे आ कर,बस तुम्हारा ही नाम लिखा करता था…
संता को अपना कुत्ता बेचना था. बंता उसे खरीदने वाला था. . . . बंता - क्या यह कुत्ता वफादार है? . . संता - हां जी, मै इसको तिन बार पहले भी बेच चूका हू, ये इतना वफादार है की हर बार मेरे पास वापिस आ जाता है.
सच्चाई थी पहले के लोगों कीजबानों मेंसोने के थे दरवाजे मिट्टी केमकानों में !!
वक़्त की कीमतकोई उसअख़बार से पूछे . . .दिनबीत जाने के बादजिसकी कोई कीमतनहीं होती...
कैसे कहूँ कि अपना बना लो मुझे;
बाहों में अपनी समा लो मुझे;
बिन तुम्हारे एक पल भी कटता नहीं;
आ कर एक बार मुझ से चुरा लो मुझे....!!!!
ुज़र चली है दबे पावं दिवाली की छुट्टियाँ,खयाल-ए-नौकरी आया तो आंखें भर आई..
ज़ख्म इतने गहरे हैं इज़हार क्या करें; हम खुद निशान बन गए वार क्या करें; मर गए हम मगर खुलो रही आँखें; अब इससे ज्यादा इंतज़ार क्या करें!
वो याद करेगी जिस दिन भी मेरी मोहब्बत को...
रोएगी बहुत वो उस दिन फिर मेरी होने के लिए.!!
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