कौन कहता है कि लटकने से 'लम्बाई' बढ़ती है?
अगर ऐसा होता तो 'टट्टे' आसमान छू रहे होते।
हम मरना भी उस अंदाज़ में पसंद करते है,
जिस अंदाज में लोग जीने के लिये तरसते है..!!
लिखने वाले ने क्या खूब लिखा है,
"जिंदगी जब मायूस होती है, तभी महसूस होती है..!!"
नींद का बंटवारा कुछ यूँ हुआ मेरा "ऐ दोस्तों"
कुछ मोबाइल के हिस्से आयी और कुछ ख्वाबो के हाथ लगी..!!
“वो नरम लबों का मेरे लबों को चूम कर कहना,”हो गयी न जिद पूरी ,कोई देख न ले,
अब तो जाने दो...!!
रहने दो अब तुम उन्हें पढ ना सकोगे...
बरसात में भीगे हुए कागज की तरह है वो लोग ..
बडी देर से देख रहा हूँ आज तस्वीर तेरी,
देखकर जाने कयूँ लगा कि तुम वो ना रहे जो पहले थे..!!
आज उसने एक बात कहकर मुझे रूला दिया...
जब दर्द बरदाश नही कर सकते तो मोहब्बत
क्यों की..!!
नींद भी नीलाम हो जाती हैं बाज़ार-ए-इश्क़ में,
इतना आसान नहीं हैं किसी को भूल कर सो जाना।
लोगों ने पूछा कि कौन है वोह जो तेरी ये उदास हालत कर गया ?
मैंने मुस्कुरा के कहा उसका नाम हर किसी के लबों पर अच्छा नहीं लगता....!
मिटा दे उसकी तस्वीर को मेरी ऑखॅ से ए मेरे खुदा......
अब तो उसका दीदार मुझे ख्वाबो मे भी पसन्द नही
किसी ने क्या खूब कहा है, अकड़ तो सब में होती है..
झुकता वही है जिसे किसी की फिकर होती है...
इतना सोच लेना
किसी पे मर मिटने से पहले..
कि गवाने के लिए
एक ही जान होती है..
💔💔😞💔💔
खामोशी मिली थी तेरे ईश्क की सौगात बनकर...
और अब आहः निकलती है तो लोग वाह वाह कर देते हैं...💔👈
मिटा दे उसकी तस्वीर को मेरी ऑखॅ से ए मेरे खुदा......
अब तो उसका दीदार मुझे ख्वाबो मे भी पसन्द नही
किश्तों मे खुदकुशी कर रही है जिदंगी..,
एक इंतज़ार तेरा मुझे पूरा मरने नही देता...!!
👣
खामोशी मिली थी तेरे ईश्क की सौगात बनकर...
और अब आहः निकलती है तो लोग वाह वाह कर देते हैं...💔👈
मैं तो हर पल ख़ुशी देता हूँ तुम्हें....
तुम ये गम लाते कहाँ से हो💔👈
अधूरी मोहब्बत मिली तो नींदें भी रूठ गयी…! गुमनाम ज़िन्दगी थी तो कितने सकून से सोया करते थे…!!
वहां तक तो साथ चलो जहाँ तक साथ मुमकिन है , जहाँ हालात बदलेंगे वहां तुम भी बदल जाना
इतना सोच लेना
किसी पे मर मिटने से पहले..
कि गवाने के लिए
एक ही जान होती है..
💔💔😞💔💔
अजीब सी बस्ती में ठिकाना है मेरा जहाँ लोग मिलते कम झांकते ज़्यादा है
लोगों ने पूछा कि कौन है वोह जो तेरी ये उदास हालत कर गया ?
मैंने मुस्कुरा के कहा उसका नाम हर किसी के लबों पर अच्छा नहीं लगता....!
निकली थी बिना नकाब आज वो घर से मौसम का दिल मचला लोगोँ ने भूकम्प कह दिया
अगर बच्चा घर पर पढ रहा हो तो !
दिल्ली वाले: मेरा बच्चा कितना अच्छा लग रहा
पढते हुए.
पंजाब वाल: साडा मुंडा किना सोणा लग रहा है.
हरियाणा वाले : अरै ओ कमीण कित्ते नही पटवारी
लागता इन डांगरा नै खोल ले
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